दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के द्वारा बटाला रोड स्थित श्री रघुनाथ मंदिर में”श्री शिव कथा” का आयोजन किया गया।

0
8

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के द्वारा बटाला रोड स्थित श्री रघुनाथ मंदिर में”श्री शिव कथा” का आयोजन किया गया।जिस में सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री वीरेशा भारती जी ने पार्वती जन्म प्रसंग को संगत के समक्ष रखा।साध्वी जी ने बताया की जिस समय माता सती में अपने आपको यज्ञ अग्नि में भस्मीभूत कर दिया उससे पहले वह भगवान शिव के चरणों में प्रार्थना करती है कि अगले जन्म में भी वह उन्हें पति रूप में प्राप्त हो।और अगले जन्म में माता सती हिमालय राज्य व मैना के यहां पुत्री रूप में जन्म लेती हैं।उनके जन्म लेने पर सारा हिमालय आनंद के सागर में डूब गया। साध्वी जी ने बताया की पुत्री के जन्म लेने पर उनके माता-पिता की प्रसन्नता की कोई कमी ना रही। परंतु आज के परिवेश में पुत्री को जन्म लेने से पहले ही मां के गर्भ में दफना दिया जाता है।वह कन्या जिसे भारत भूमि पर लक्ष्मी का रूप कहा जाता है और नवरात्रों में नन्ही नन्ही कन्याओं की पूजा होती है। उसी भूमि पर नारी को सम्मान प्राप्त नहीं हो पा रहा। साध्वी जी ने कहा कि जहां नारी को सम्मान प्राप्त नहीं हो पाता वह राष्ट्र कभी भी उन्नति के शिखरों को प्राप्त नहीं कर पाएंगे। हमारे देश के वर्तमान पतन का कारण भी यही है कि हमने शक्ति की इन सजीव प्रतिमाओं के प्रति आदर की भावना नहीं रखी ।मनुस्मृति में मनु जी कहते हैं “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता” भाव जहां नारियों की पूजा की जाती है वही देवताओं का निवास होता है अतः हमें अपनी धारणाओं को त्याग करें कि पुत्र ही कुल का तारक है, बेटी को सम्मान प्रेम और संस्कारों से पोषित करना चाहिए, क्योंकि संस्कारी संतान ही माता-पिता का नाम रोशन कर सकती है।

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के द्वारा बटाला रोड स्थित श्री रघुनाथ मंदिर में”श्री शिव कथा” का आयोजन किया गया।जिस में सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री वीरेशा भारती जी ने पार्वती जन्म प्रसंग को संगत के समक्ष रखा।साध्वी जी ने बताया की जिस समय माता सती में अपने आपको यज्ञ अग्नि में भस्मीभूत कर दिया उससे पहले वह भगवान शिव के चरणों में प्रार्थना करती है कि अगले जन्म में भी वह उन्हें पति रूप में प्राप्त हो।और अगले जन्म में माता सती हिमालय राज्य व मैना के यहां पुत्री रूप में जन्म लेती हैं।उनके जन्म लेने पर सारा हिमालय आनंद के सागर में डूब गया। साध्वी जी ने बताया की पुत्री के जन्म लेने पर उनके माता-पिता की प्रसन्नता की कोई कमी ना रही। परंतु आज के परिवेश में पुत्री को जन्म लेने से पहले ही मां के गर्भ में दफना दिया जाता है।वह कन्या जिसे भारत भूमि पर लक्ष्मी का रूप कहा जाता है और नवरात्रों में नन्ही नन्ही कन्याओं की पूजा होती है। उसी भूमि पर नारी को सम्मान प्राप्त नहीं हो पा रहा। साध्वी जी ने कहा कि जहां नारी को सम्मान प्राप्त नहीं हो पाता वह राष्ट्र कभी भी उन्नति के शिखरों को प्राप्त नहीं कर पाएंगे। हमारे देश के वर्तमान पतन का कारण भी यही है कि हमने शक्ति की इन सजीव प्रतिमाओं के प्रति आदर की भावना नहीं रखी ।मनुस्मृति में मनु जी कहते हैं “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता” भाव जहां नारियों की पूजा की जाती है वही देवताओं का निवास होता है अतः हमें अपनी धारणाओं को त्याग करें कि पुत्र ही कुल का तारक है, बेटी को सम्मान प्रेम और संस्कारों से पोषित करना चाहिए, क्योंकि संस्कारी संतान ही माता-पिता का नाम रोशन कर सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here